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महर की शरई मिकदार

कम से कम महर:
हनफिया के नजदीक महर की कम से कम मिकदार १० दिरहम है, उससे कम महर बांधना मो’तबर नही, ओर अगर कम मूतअय्यन कर लिया फिर भी १० दिरहम ही महर वाजिब होगी, १० दिरहम का वजन आज के हिसाब ढाई तोला चांदी यानी ३० ग्राम ६१८ मिली ग्राम है, (इतनी चांदी या उसकी मौजूदा कीमत वाजिब होगी और उससे कम महर दुरुस्त नही)
[जदीद फिकही मसाइल:१/१९६]
[फतावा मुफ़्ती महमूद:५/३१५]
[फतावा दारुल उलूम जकरिया:३/६२४]

 

ज्यादा से ज्यादा महर:
ज्यादा महर की कोई हद नही, लेकिन कम महर ही बेहतर है जैसा के ईमाम अहमद, ओर तबरानी ने हजरते आइशा (रदि) से नकल किया है के ज्यादा बा-बरकत औरत वो है जिसका महर कम हो.
 اخف النساء صداقا اعظمهن بركا
(مجمع الزوائد: 4/516)
हजरत उमर (रदि) के बारे में मरवी है के नबी ऐ करीम ﷺ ने फरमाया के महर में गुलु (हद से ज्यादा) न करो, अगर महर का ज्यादा रखना दुनिया मे इज़्ज़त ओर अल्लाह के नजदीक तक़वा की बात होती तो नबी ए करीम ﷺ उसके ज्यादा मुश्तहिक थे.
[इब्ने माजा, अब दावूद शरीफ, तिर्मिज़ी शरीफ]
ओर मशहूर मुहद्दिस इमाम नववी (रह) फरमाते है के: मुश्तहब है के महर ५०० दिरहम से ज्यादा ना हो जो अजवाज ओर साहबजादीयो का महर था.
المستحب ان لا يزيد على خمس مآة درهم و هو صداق ازواج النبي و بناته
[शरहे मुहज्जब:१६/३२८] 
महरे फातमी:
हजरत फातिमा (रदि) का महर ५०० दिरहम था, जो आज के वजन के हिसाब से १५० तोला चांदी है या १७५० ग्राम चांदी है (१ तोला= ११ ग्राम ओर ६६४ मिली ग्राम)
[फतावा रहीमियाह: ८/2₹२३२]
[फतावा महमूदियाह: १२/२९]
كان صداق بنات رسول اللهﷺ و نسائه خمس مآة درهم اثنتى عشرة اوقية و نصفا 
(طبقات ابن سعد : 8/22 )

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