सवाल:
मैंने कल १०० किलोमीटर व्यापार के लिए सफर किया था, तो मेरी असर ओर जोहर की नमाज छूट गए थी,
आज घर आ गया हूं और अब मुझे उस्की क़ज़ा करनी है तो कितनी रकात नमाज पढ़नी है.?
जवाब:
शरई सफर में क़ज़ा हुई नमाज को कसर यानी ४ रकात को २ रकात ही पढ़ना है ओर मुकीम (यानी अपने मकाम) पर कजा हुई नमाज को सफर में हो या मक़ाम पर हो हर हाल में मुकम्मल पढ़ना है.
📚 फतावा दिनीयाह: १/५८०
 (मुफ़्ती) बंदे इलाही कुरैशी गणदेवी.
अनुवादक: मव.मकबूल मव.अय्यूब जोगियात (खरोड)

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