सवाल:

नया मकान, नई दुकान & कारोबार शुरू करने के मौके पर कुरआन ए पाक की

तिलावत ओर दुआ के बाद कुछ खाने पीने का प्रोग्राम किया जा सकता है.?

इस तरह शुरू करने की कोई हकीकत शरीयत में है.?

बिस्मिहि तआला

जवाब:

फतावा शामी & फतावा आलमगीरी में लिखा है के ११ मौके ऐसे है जिन में खाने पीने की दावत मुस्तहब है,

उनमे से एक वकिराह है,

  1. वकिराह उस खाने को कहा जाता है जिसे नया मकान के खोलने के मौके पर खिलाया जाता है, बुखारी शरीफ हिस्सा-२, हाशय नंबर-५ में है के दुकान या मकान के खोलने के मौके पर दोस्तो अहबाब वगैरह को खाने की दावत देना जाइज़ है.

अल-बट्टा ये खाने की दावत कुरआन ख्वानी के बदले में नही होनी चाहिए.
इस मौके पर कुरआन ख्वानी को जरूरी समझना सही नही है, फक्त वल्लाहु अ’अलम.

إن الولائم عشرة مع واحد من عدها قد عز في أقرانه فالخرس عند نفاسها وعقيقة للطفل والإعذار عند ختانه ولحفظ قرآن وآداب لقد قالوا الحذاق لحذقه وبيانه ثم الملاك لعقده ووليمة في عرسه فحرص على إعلانه وكذاك مأدبة بلا سبب يرى ووكيرة لبنائه لمكانه ونقيعة لقدومه ووضيمة لمصيبة وتكون من جيرانه ولأول الشهر الأصم عتيرة بذبيحة جاءت لرفعة شأنه

(२)
صحيح البخاري :२/७७६ – كتاب النكاح، تحت باب ، الوليمة حق، ديوبند۔

(३)
قال تاج الشريعة في شرح الهداية : ان القرآن بالاجرة لا يستحق الثواب لا للميت ولا للقارئ، وقال العيني في شرح الهدايه : و يمنع القارئ للدنيا، والآخذ و المعطي آثمان،

(رد المحتار علي الدر المختار: 56/6 –بيروت )

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