सवाल:

कुरआन ऐ करीम को अरबी के अलावाह लिखना ओर पढना कैसा है.?

जवाब: 

नॉट: कुरआन ए करीम की आयत को हिंदी, गुजराती, इंग्लिश य किसी ज़ुबान में लिखना चारो इमाम के नजदिक हरगिज जाइज नही, कुरआन की जुबान अरबी है, इस लिए अरबी में ही लिखना जरूरी है.

बहोत से लोग गुजराती, हिंदी और इंग्लिश में कुरआन छपवाते है, ओर नेकी का काम समझते है.
जिन लोगो को पढते नही आता उनको चाहिए के आहिस्ता आहिस्ता सीखे, लेकिन अफसोस के आज कारोबार के लिए वक़्त है लेकिन कुरआन सीखने का वक़्त नही.

हाँ, उसको तर्जुमा या तफसीर किसी भी जुबान में लिख सकते है.

  • फतावा रहिमीयाह: ३/१६
  • फतावा महमुदियाह: ३/५११
  • किताबुन नवाजिल: १५/५४

(मुफ्ती) बंदे इलाही कुरैशी गणदेवी
अनुवादक: मव.मकबूल मव.अय्यूब जोगियात (खरोड)

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